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मतदाता सूची पुनरीक्षण पर प्रशासन की पैनी नजर: 9 वरिष्ठ आईएएस-पीसीएस अधिकारियों को मिली कमान, पारदर्शी निस्तारण पर जोर

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देहरादून। उत्तराखंड में विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी, सटीक और समयबद्ध बनाने के लिए मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने बड़ा कदम उठाया है। मतदाता सूची से जुड़े दावे और आपत्तियों के निस्तारण की गुणवत्ता और निगरानी सुनिश्चित करने के लिए भारतीय प्रशासनिक सेवा और प्रांतीय सिविल सेवा के नौ वरिष्ठ अधिकारियों को पर्यवेक्षण अधिकारी (सुपरवाइजरी ऑफिसर) की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है।

उत्तराखंड में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के तहत मतदाता सूची को लेकर प्राप्त दावे और आपत्तियों के निस्तारण की प्रक्रिया अब कड़ी निगरानी में होगी। मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने प्रक्रिया की मॉनिटरिंग के लिए नौ आईएएस और पीसीएस अधिकारियों को पर्यवेक्षण अधिकारी के रूप में तैनात किया है। ये अधिकारी संबंधित विधानसभा क्षेत्रों में दावे-आपत्तियों के निस्तारण से लेकर नोटिस वितरण, तामीली और सुनवाई तक की पूरी प्रक्रिया पर नजर रखेंगे। मुख्य निर्वाचन अधिकारी की ओर से जारी आदेश के अनुसार पर्यवेक्षण अधिकारियों को तीन जिलों की जिम्मेदारी दी गई है। इनमें हरिद्वार में चार, नैनीताल में दो और ऊधम सिंह नगर में तीन अधिकारी तैनात किए गए हैं। अधिकारियों को भारत निर्वाचन आयोग की ओर से निर्धारित नियमों और प्रक्रिया के अनुरूप दावे एवं आपत्तियों का गुणवत्तापूर्ण निस्तारण सुनिश्चित कराने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। हरिद्वार जिले में डॉ. संदीप तिवारी, ललित नारायण मिश्र, नन्द कुमार और गोपाल राम बिनवाल को पर्यवेक्षण अधिकारी बनाया गया है। जिले के संबंधित विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों में मतदाता सूची से जुड़े मामलों के निस्तारण की प्रक्रिया की नियमित निगरानी इन अधिकारियों की जिम्मेदारी होगी। नैनीताल जिले में संजय कुमार और विनीत तोमर को पर्यवेक्षण अधिकारी नियुक्त किया गया है। वहीं ऊधम सिंह नगर जिले में प्रकाश चन्द्र दुम्का, जय किशन और दिवेश शाशनी को जिम्मेदारी दी गई है। अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में चल रही प्रक्रिया का मौके पर निरीक्षण कर यह सुनिश्चित करना होगा कि किसी पात्र मतदाता का नाम गलत तरीके से प्रभावित न हो और प्राप्त आपत्तियों का निर्धारित प्रक्रिया के तहत निस्तारण किया जाए। पर्यवेक्षण अधिकारियों को दावे और आपत्तियों से जुड़ी पूरी प्रक्रिया पर नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं। इसमें नोटिस का वितरण, उसकी तामीली और संबंधित मामलों की सुनवाई भी शामिल है। इसके साथ ही यह भी देखा जाएगा कि निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुरूप सभी मामलों का निष्पक्ष और गुणवत्तापूर्ण तरीके से निस्तारण हो रहा है या नहीं। आदेश में पर्यवेक्षण अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की गई है। उन्हें अपने दैनिक निरीक्षण की आख्या संबंधित मंडलायुक्त के माध्यम से मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय को सप्ताह में दो बार उपलब्ध करानी होगी। इससे जिलों में चल रही SIR प्रक्रिया की नियमित समीक्षा और निगरानी संभव होगी। निर्वाचन आयोग की ओर से निर्धारित पुनरीक्षण अवधि पूरी होने तक नामित अधिकारी आयोग के नियंत्रण, पर्यवेक्षण और अनुशासन के अधीन रहेंगे। मुख्य निर्वाचन अधिकारी का यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। माना जा रहा है कि नौ अधिकारियों की तैनाती से दावे-आपत्तियों के निस्तारण की प्रक्रिया में पारदर्शिता, गति और जवाबदेही बढ़ेगी।