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दीपों की रोशनी में नहला बाबा केदार का दरबार: 20 कुंतल फूलों से सजा धाम, भैरवनाथ के कपाट हुए शीतकाल के लिए बंद

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केदारनाथ। देवभूमि उत्तराखंड के हिमालयी छोर पर स्थित विश्व प्रसिद्ध ग्यारहवें ज्योतिर्लिंग भगवान केदारनाथ धाम में दीपावली का यह पावन पर्व बेहद अलौकिक और ऐतिहासिक रूप में मनाया जा रहा है। पर्व के इस पावन अवसर पर केदारपुरी का कोना-कोना रंग-बिरंगी रोशनी और फूलों की सुगंध से महक उठा है। मंदिर समिति के विशेष प्रयासों से बाबा केदार के दरबार और संपूर्ण मंदिर परिसर को देश-विदेश से मंगाए गए लगभग 18 से 20 क्विंटल भव्य एवं सुगंधित फूलों से सजाया गया है। यह दिव्य सजावट यहाँ पहुंचने वाले हर श्रद्धालु के लिए आकर्षण का मुख्य केंद्र बनी हुई है।

दीपावली के पावन पर्व पर हिमालय में स्थित बाबा केदारनाथ धाम रंग-बिरंगे फूलों की खुशबू और भव्य सजावट से जगमगा उठा है। दीपोत्सव के अवसर पर मंदिर परिसर और बाबा के दरबार को करीब 18 से 20 क्विंटल फूलों से सजाया गया है। फूलों की आकर्षक सजावट श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। दूसरी ओर, धाम के क्षेत्रपाल और रक्षक भगवान भुकुंड भैरवनाथ मंदिर के कपाट धार्मिक परंपराओं के अनुसार शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए हैं। इसके साथ ही बाबा केदारनाथ के कपाट बंद होने की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है। बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के सदस्य डॉ. विनीत चंद्र पोस्ती ने बताया कि दीपावली के अवसर पर धाम को भव्य रूप से सजाया गया है। मंदिर और आसपास के परिसर में रंग-बिरंगे फूलों से की गई सजावट श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रही है। दीपावली पर बाबा के दरबार में दीप प्रज्वलित कर पर्व मनाने की तैयारियां भी की गई हैं।  उन्होंने बताया कि भगवान भुकुंड भैरवनाथ के कपाट विधि-विधान और धार्मिक परंपराओं के अनुसार शीतकाल के लिए बंद किए गए। इस अवसर पर स्थानीय हक-हकूकधारी, तीर्थ पुरोहित, मंदिर समिति के सदस्य तथा पुलिस और प्रशासन के अधिकारी-कर्मचारी मौजूद रहे। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भैरवनाथ को केदारनाथ धाम का क्षेत्रपाल और रक्षक माना जाता है। उनके कपाट बंद होने के साथ ही धाम में शीतकालीन व्यवस्था और बाबा केदारनाथ के कपाट बंद करने से जुड़ी धार्मिक प्रक्रिया आगे बढ़ गई है।मंदिर समिति के अनुसार, आगामी 11 नवंबर को विधि-विधान के साथ बाबा केदारनाथ धाम के कपाट भी शीतकाल के लिए बंद कर दिए जाएंगे। इसके बाद ऊंचाई वाले क्षेत्र में स्थित धाम में नियमित दर्शन की प्रक्रिया शीतकाल के लिए विराम लेगी। कपाट बंद होने से पहले श्रद्धालुओं के पास बाबा के दर्शन और दीपोत्सव में शामिल होने का अवसर है। डॉ. पोस्ती ने श्रद्धालुओं से अपील की कि वे दीपावली के अवसर पर केदारनाथ धाम पहुंचकर श्रद्धा के साथ दीप प्रज्वलित करें और दीपोत्सव मनाएं। साथ ही उन्होंने मंदिर की मर्यादा, पवित्रता और धार्मिक परंपराओं का सम्मान करने का आग्रह किया। उन्होंने श्रद्धालुओं से किसी भी तरह की अव्यवस्था से बचने और धाम की गरिमा बनाए रखने की अपील भी की। दीपावली पर फूलों से सजा बाबा केदार का दरबार और भैरवनाथ मंदिर के कपाट बंद होने की धार्मिक परंपरा ने धाम के माहौल को विशेष बना दिया है। अब 11 नवंबर को होने वाले कपाट बंदी समारोह की तैयारियों पर श्रद्धालुओं और तीर्थ पुरोहितों की नजरें टिकी हैं।