देहरादून। उत्तराखंड में तकनीकी शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और युवाओं को रोजगार के वैश्विक अवसर उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार ने कड़ा कदम उठाया है। सचिवालय में तकनीकी शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक लेते हुए मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने प्रदेश के शिक्षण संस्थानों, फैकल्टी और विद्यार्थियों के स्तर को बेहतर बनाने के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए। उन्होंने स्पष्ट किया कि शिक्षण संस्थानों और इंडस्ट्री के बीच की दूरी को खत्म कर राज्य के लिए एक मजबूत रोडमैप तैयार किया जाए।
उत्तराखंड में तकनीकी शिक्षा को रोजगार और उद्योग की जरूरतों से जोड़ने के लिए सरकार अब बड़े स्तर पर बदलाव की तैयारी कर रही है। प्रदेश में 5-6 स्थानों को तकनीकी शिक्षा हब के रूप में विकसित किया जाएगा, जहां विद्यार्थियों को लैब, लाइब्रेरी और हॉस्टल जैसी आधुनिक सुविधाएं एक ही परिसर में उपलब्ध कराने की योजना है। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने गुरुवार को सचिवालय में तकनीकी शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान अधिकारियों को इसके लिए विस्तृत रोडमैप तैयार करने के निर्देश दिए। मुख्य सचिव ने प्रदेश के तकनीकी शिक्षण संस्थानों, फैकल्टी और विद्यार्थियों की स्थिति की जानकारी लेते हुए कहा कि तकनीकी शिक्षा की गुणवत्ता सुधारना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि कॉलेजों में पढ़ाई और वास्तविक औद्योगिक जरूरतों के बीच मौजूद अंतर को कम करना होगा, ताकि इंजीनियरिंग और पॉलीटेक्निक से निकलने वाले विद्यार्थियों को डिग्री के साथ रोजगार के लिए जरूरी व्यावहारिक कौशल भी मिल सके। मुख्य सचिव ने कहा कि शिक्षण संस्थानों और इंडस्ट्री के बीच बेहतर समन्वय समय की जरूरत है। इसके लिए तकनीकी संस्थानों को उद्योग जगत की जरूरतों के अनुरूप तैयार किया जाए। विद्यार्थियों को पढ़ाई के दौरान ही वास्तविक कार्य वातावरण से परिचित कराने पर जोर दिया जाए। उन्होंने अधिकारियों को प्रदेश की तकनीकी शिक्षा के लिए स्पष्ट और दीर्घकालिक रोडमैप तैयार करने के निर्देश दिए। इसमें संस्थानों की क्षमता, विद्यार्थियों की संख्या, फैकल्टी, आधुनिक लैब, रोजगार और उद्योग से जुड़ाव जैसे पहलुओं को शामिल करने को कहा गया। मुख्य सचिव ने इंजीनियरिंग और पॉलीटेक्निक कॉलेजों से पासआउट होने वाले विद्यार्थियों को पीएम इंटर्नशिप योजना का लाभ दिलाने के लिए विशेष मार्गदर्शन की व्यवस्था करने को कहा। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को इस योजना के प्रति जागरूक किया जाए, ताकि अधिक से अधिक युवा इसका लाभ उठा सकें। योजना के तहत युवाओं को देश की शीर्ष 500 कंपनियों में वास्तविक कार्य अनुभव हासिल करने का अवसर मिलता है। इसके साथ उन्हें स्टाइपेंड और एकमुश्त ज्वाइनिंग अनुदान भी दिया जाता है। मुख्य सचिव ने कहा कि युवाओं को पढ़ाई के बाद सीधे रोजगार की दुनिया से जोड़ने में ऐसी योजनाएं महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। उत्तराखंड के युवाओं को विदेशों में रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने पर भी बैठक में जोर दिया गया। मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि कॉलेजों में आयोजित होने वाले रोजगार मेलों में ओवरसीज एम्प्लॉयर्स को भी आमंत्रित किया जाए। इससे विद्यार्थियों को देश के साथ ही अंतरराष्ट्रीय रोजगार बाजार में उपलब्ध अवसरों की जानकारी और सीधे प्लेसमेंट का मौका मिल सकेगा। मुख्य सचिव ने प्रदेश में 5-6 स्थानों को तकनीकी शिक्षा हब के तौर पर विकसित करने को कहा। इन हब में आधुनिक लैब, लाइब्रेरी, हॉस्टल और अन्य जरूरी सुविधाओं को एकीकृत रूप से विकसित करने पर जोर दिया गया। उन्होंने नए प्रोजेक्ट्स के लिए होलिस्टिक प्लान तैयार करने के निर्देश दिए, ताकि निर्माण के दौरान किसी सुविधा की कमी न रहे। पुराने इंजीनियरिंग और पॉलीटेक्निक कॉलेजों के लिए भी सैचुरेशन प्लान तैयार करने को कहा गया। मुख्य सचिव ने अधिकारियों से कहा कि अच्छे और उपयोगी प्रोजेक्ट तैयार किए जाएं, फंडिंग की समस्या नहीं होगी। मुख्य सचिव ने तकनीकी कॉलेजों को सिर्फ डिग्री देने वाले संस्थान के बजाय राज्य के विकास में भागीदार बनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि वर्तमान में विभिन्न विभागों को अध्ययन और कंसल्टेंसी के लिए बाहरी एजेंसियों की सेवाएं लेनी पड़ती हैं। राज्य में ऐसे मजबूत तकनीकी संस्थान विकसित किए जा सकते हैं, जो सरकारी विभागों को विशेषज्ञ अध्ययन और कंसल्टेंसी उपलब्ध कराएं। इसके लिए कॉलेजों की क्षमता बढ़ाने के साथ फैकल्टी भर्ती पर विशेष फोकस करने के निर्देश दिए गए। मुख्य सचिव ने कहा कि मजबूत फैकल्टी और बेहतर संस्थागत ढांचा तैयार होने पर उत्तराखंड के तकनीकी शिक्षण संस्थान शिक्षा के साथ शोध, नवाचार और कंसल्टेंसी के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकेंगे।

