भारत माता मंदिर के संस्थापक, महान मनीषी और समन्वय सेवा ट्रस्ट के प्रणेता ब्रह्मलीन स्वामी सत्यामित्रनंद गिरि महाराज की समाधि स्थली पर आयोजित श्रीविग्रह मूर्ति स्थापना समारोह के दूसरे दिन धर्म और राजनीति की विशिष्ट विभूतियों का अद्भुत संगम देखने को मिला। कार्यक्रम का भव्य शुभारंभ मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा और जूना अखाड़ा के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि महाराज ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलन कर किया। द्वितीय दिवस पर आयोजित धर्मसभा एवं संत सम्मेलन में देशभर से पधारे संत-महात्माओं, धर्माचार्यों और विद्वानों ने स्वामी सत्यामित्रनंद गिरि महाराज के जीवन, दर्शन और राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला। वक्ताओं ने कहा कि स्वामी जी ने सनातन धर्म की समन्वय परंपरा को वैश्विक मंच पर प्रतिष्ठित किया और भारत माता मंदिर की स्थापना कर राष्ट्रवाद व आध्यात्मिकता के अद्वितीय संगम को साकार रूप दिया। संतों ने राष्ट्र निर्माण में आध्यात्मिक मूल्यों की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ब्रह्मलीन स्वामी सत्यामित्रनंद गिरि महाराज को नमन करते हुए कहा कि उनका संपूर्ण जीवन मानवता की सेवा और राष्ट्र की एकता के लिए समर्पित रहा। उन्होंने कहा कि स्वामी जी द्वारा दिखाया गया समन्वय का मार्ग आज के समय में समाज को जोड़ने और राष्ट्र को सशक्त बनाने के लिए अत्यंत प्रासंगिक है। मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत माता मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि राष्ट्रभक्ति का एक जीवंत केंद्र है, जो देशप्रेम की भावना को जागृत करता है। उन्होंने यह भी कहा कि उत्तराखंड सरकार स्वामी जी के आदर्शों और मार्गदर्शन पर चलते हुए राज्य की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक गरिमा को अक्षुण्ण रखने के लिए प्रतिबद्ध है। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे जूना अखाड़ा के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि महाराज ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि स्वामी सत्यामित्रनंद गिरि महाराज सनातन की उदार और समन्वयकारी चेतना के प्रतीक थे। इस अवसर पर बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान, जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव, विहिप के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार, योग गुरु स्वामी रामदेव, प्रमोद कृष्णन सहित अनेक संत-महात्मा और जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।

