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उत्तराखंड के ग्रामीण और सीमावर्ती क्षेत्रों में बिछड़ेगा सड़कों का नया जाल: पीएमजीएसवाई-चौथे चरण के तहत 528 सड़कों व 19 पुलों के प्रस्तावों को मिली गति

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देहरादून। उत्तराखंड के दूरदराज, पर्वतीय और सीमावर्ती ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन को सुगम बनाने और ग्रामीण बुनियादी ढांचे को क्रांतिकारी गति देने की दिशा में एक बहुत बड़ा कदम उठाया गया है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत राज्य में सड़क संपर्कता को सुदृढ़ करने के प्रस्तावों को केंद्र सरकार से तेजी से हरी झंडी मिल रही है। केंद्रीय ग्रामीण विकास, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को एक आधिकारिक पत्र भेजकर प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना-चतुर्थ चरण के अंतर्गत द्वितीय चरण के प्रस्तावों के अनुमोदन की प्रगति से अवगत कराया है।

उत्तराखंड के दूरस्थ, दुर्गम और सीमावर्ती गांवों को सड़क सुविधा से जोड़ने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) के चौथे चरण के द्वितीय चरण के तहत राज्य सरकार की ओर से प्रस्तावित 3,172 किलोमीटर लंबी 528 सड़कों और 19 पुलों के निर्माण की स्वीकृति प्रक्रिया आगे बढ़ गई है। केंद्रीय ग्रामीण विकास, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को पत्र भेजकर इसकी जानकारी दी है। इन प्रस्तावों को अंतिम मूल्यांकन और स्वीकृति के लिए अधिकार प्राप्त समिति के समक्ष प्रस्तुत किया गया है। यदि प्रस्तावों को अंतिम मंजूरी मिलती है तो प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क संपर्कता को नई मजबूती मिलेगी। केंद्रीय मंत्री ने अपने पत्र में ग्रामीण सड़क संपर्कता को मजबूत करने के लिए मुख्यमंत्री धामी की प्रतिबद्धता की सराहना की है। पत्र के अनुसार, राज्य सरकार की ओर से प्रस्तावित सड़कों और पुलों के निर्माण से जुड़े प्रस्तावों पर 30 सितंबर 2026 को तकनीकी-आर्थिक समिति की बैठक आयोजित की गई थी। आवश्यक अनुमोदन प्राप्त होने के बाद इन प्रस्तावों को अंतिम निर्णय के लिए अधिकार प्राप्त समिति के पास भेज दिया गया है। इससे प्रदेश में ग्रामीण आधारभूत ढांचे के विस्तार की उम्मीदें बढ़ गई हैं। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए उत्तराखंड में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत 333 किलोमीटर सड़क निर्माण का भौतिक लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके लिए 420 करोड़ रुपये का वित्तीय आवंटन किया गया है। अब तक 35 किलोमीटर सड़क निर्माण का कार्य पूरा किया जा चुका है। इसके अलावा 210 करोड़ रुपये की लागत से मदररूट के सुदृढ़ीकरण का काम भी योजना में शामिल है। इस वित्तीय वर्ष में अब तक लगभग 57 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। सीमावर्ती क्षेत्रों की रणनीतिक और भौगोलिक महत्ता को देखते हुए वाइब्रेंट विलेजेज कार्यक्रम के तहत भी सड़क निर्माण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इस कार्यक्रम में स्वीकृत पांच सड़क कार्यों में से 44 किलोमीटर सड़क निर्माण पूरा हो चुका है। इससे सीमावर्ती क्षेत्रों में आवागमन की सुविधा बेहतर होने के साथ स्थानीय लोगों को भी लाभ मिलने की उम्मीद है। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विश्वास जताया है कि राज्य सरकार के निरंतर प्रयासों से निर्माण कार्यों में तेजी आएगी। उन्होंने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए केंद्र सरकार और ग्रामीण विकास मंत्रालय की ओर से हरसंभव सहयोग एवं आवश्यक समन्वय का भरोसा भी दिया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रस्तावों की स्वीकृति प्रक्रिया आगे बढ़ने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के चौथे चरण के तहत प्रस्तावित कार्यों को मंजूरी मिलने से उत्तराखंड के ग्रामीण क्षेत्रों की सड़क संपर्कता मजबूत होगी। विशेष रूप से दूरस्थ और सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों को आवागमन की बेहतर सुविधा मिलेगी और ग्रामीण विकास को नई गति प्राप्त होगी। पहाड़ी राज्य उत्तराखंड में सड़कें केवल आवागमन का साधन नहीं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा हैं। ऐसे में 528 सड़कों और 19 पुलों के प्रस्तावों को अंतिम स्वीकृति मिलने के बाद इनके धरातल पर उतरने से गांवों की तस्वीर बदलने की उम्मीद है। हालांकि, अब सबकी निगाहें अंतिम मंजूरी और निर्माण कार्य शुरू होने की समयसीमा पर टिकी हैं।