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तकनीकी सशक्तिकरण की ओर सीबीएसई: ऑनस्क्रीन मूल्यांकन से रुकेगी मानवीय गड़बड़ी और अंकों की गड़बड़ी

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केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने शिक्षा के क्षेत्र में तकनीकी क्रांति की ओर एक और ऐतिहासिक कदम बढ़ाया है। बोर्ड ने मूल्यांकन प्रणाली को पूरी तरह आधुनिक और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से कक्षा 12 की उत्तर पुस्तिकाओं की जांच अब ऑनस्क्रीन डिजिटल माध्यम से कराने का निर्णय लिया है। दशकों से चली आ रही पारंपरिक 'पेन-पेपर' कॉपी जांचने की व्यवस्था को अब समाप्त कर दिया गया है। इस नई व्यवस्था के तहत अब परीक्षक कंप्यूटर और विशेष सॉफ्टवेयर के माध्यम से डिजिटल मूल्यांकन करेंगे।

सीबीएसई का यह निर्णय न केवल मूल्यांकन प्रक्रिया में तेजी लाएगा, बल्कि मानवीय त्रुटियों की संभावना को भी लगभग शून्य कर देगा। अक्सर देखा जाता है कि पारंपरिक मूल्यांकन में अंकों के योग (टोटलिंग) में गड़बड़ी या किसी प्रश्न के छूट जाने की शिकायतें आती थीं। डिजिटल प्रणाली में सॉफ्टवेयर स्वतः ही यह सुनिश्चित करेगा कि हर उत्तर का मूल्यांकन हुआ है या नहीं। इससे छात्रों को मिलने वाले परिणाम अधिक सटीक और समयबद्ध होंगे। बोर्ड का लक्ष्य है कि इस तकनीक के माध्यम से परिणामों की घोषणा में लगने वाले समय को कम किया जा सके। इस नई और जटिल प्रणाली को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए सीबीएसई ने जमीनी स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी हैं। सभी संबद्ध विद्यालयों के प्रधानाचार्यों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने शिक्षकों को ऑनस्क्रीन मूल्यांकन प्रक्रिया का गहन पूर्व अभ्यास कराएं। इसके लिए बोर्ड ने एक विशेष 'ऑनस्क्रीन मार्किंग पोर्टल' (OSM) पर अभ्यास मॉड्यूल सक्रिय कर दिया है। वास्तविक मूल्यांकन शुरू होने से पहले, शिक्षकों को इस डिजिटल इंटरफेस पर हाथ आजमाने का मौका मिलेगा, ताकि वे तकनीकी बारीकियों में दक्ष हो सकें।

सीबीएसई समन्वयक भावना भनोट ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऑनस्क्रीन मूल्यांकन से न केवल प्रशासनिक दक्षता बढ़ेगी, बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक बड़ा योगदान है। उत्तर पुस्तिकाओं की डिजिटल स्कैनिंग और व्यवस्थित आवंटन से कागज के उपयोग और उनके परिवहन में लगने वाले संसाधनों की बचत होगी। यह पूरी प्रक्रिया पूरी तरह सुरक्षित होगी, जिसमें उत्तर पुस्तिकाओं का आवंटन सॉफ्टवेयर के माध्यम से गोपनीय तरीके से किया जाएगा। शिक्षकों का मानना है कि डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली शिक्षा क्षेत्र में तकनीकी सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा बदलाव है। मूल्यांकन से पूर्व शिक्षकों को उनके संबंधित स्कूलों में ही विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके लिए सभी विद्यालयों को आधिकारिक सूचना भेज दी गई है। शुरुआती अभ्यास से शिक्षकों को नई प्रणाली को अपनाने में हिचकिचाहट नहीं होगी और वे निष्पक्षता के साथ कॉपियों की जांच कर सकेंगे। सीबीएसई के इस डिजिटल कदम से छात्रों और अभिभावकों में भी खुशी का माहौल है। उनका मानना है कि इस व्यवस्था से पुनर्मूल्यांकन की नौबत कम आएगी और मेधावी छात्रों के साथ न्याय होगा। बोर्ड का यह निर्णय स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि वह राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप आधुनिक तकनीक को अपनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।