पहाड़ में बुनियादी ढांचे का कायाकल्प: हॉट मिक्स प्लांट के लिए समतल जमीन ढूंढने की टेंशन हुई अब पूरी तरह खत्म

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देहरादून। उत्तराखंड सरकार ने राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों में सड़कों के निर्माण और डामरीकरण की प्रक्रिया को गति देने के लिए एक महत्वपूर्ण नीतिगत फैसला लिया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में 'उत्तराखंड स्टोन क्रशर एवं हॉट मिक्स प्लांट नीति-2024' में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है। इस फैसले के तहत अब पहाड़ों में राष्ट्रीय राजमार्ग (NH) और स्टेट हाईवे (SH) से मात्र 50 मीटर की दूरी पर भी हॉट मिक्स प्लांट स्थापित किए जा सकेंगे। भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग के अधिकारियों के अनुसार, अब तक राज्य में हॉट मिक्स प्लांट लगाने के लिए मुख्य सड़कों से कम से कम 100 मीटर की दूरी का कड़ा नियम लागू था। मैदानी क्षेत्रों में तो यह संभव था, लेकिन पर्वतीय क्षेत्रों की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और खड़ी ढलानों के कारण 100 मीटर की दूरी पर समतल भूमि मिलना एक बड़ी चुनौती बनी हुई थी। भूमि की कमी के कारण डामरीकरण के लिए जरूरी हॉट मिक्स प्लांट नहीं लग पा रहे थे, जिससे कई महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं का काम अधर में लटका हुआ था।

कैबिनेट द्वारा मंजूर किए गए 'तृतीय संशोधन' के तहत यह स्पष्ट किया गया है कि दूरी मानकों में यह छूट केवल पर्वतीय क्षेत्रों के लिए ही मान्य होगी। मैदानी जिलों में हॉट मिक्स प्लांट लगाने के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग और स्टेट हाईवे से 100 मीटर की दूरी का पुराना नियम ही प्रभावी रहेगा। सरकार का मानना है कि मैदानों में पर्याप्त भूमि उपलब्ध है, इसलिए वहां मानकों से कोई समझौता नहीं किया गया है। हॉट मिक्स प्लांट सड़कों के डामरीकरण के लिए आवश्यक सामग्री तैयार करने का मुख्य स्रोत होते हैं। मानकों में इस संशोधन के बाद अब ठेकेदारों और कार्यदायी संस्थाओं को प्लांट स्थापित करने के लिए उपयुक्त जगह आसानी से मिल सकेगी। इससे न केवल डामरीकरण का काम समय पर पूरा होगा, बल्कि डामर को प्लांट से निर्माण स्थल तक ले जाने की लागत और समय में भी कमी आएगी। कैबिनेट ने स्टोन क्रशर, स्क्रीनिंग प्लांट, मोबाइल स्टोन क्रशर, पल्वराईजर प्लांट और रेडीमिक्स प्लांट से संबंधित अनुज्ञा नीति में इस बदलाव को मंजूरी देकर विकास कार्यों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। इस निर्णय को राज्य के सुदूरवर्ती क्षेत्रों में कनेक्टिविटी सुधारने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) और एनएचएआई जैसी संस्थाओं के लिए अब दुर्गम क्षेत्रों में सड़क सुदृढ़ीकरण का काम करना पहले से कहीं अधिक सुगम हो जाएगा।