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कुमाऊं में फर्जी हथियार लाइसेंस नेटवर्क की जांच का दायरा बढ़ाने से एसटीएफ की कार्रवाई हुई तेज

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उत्तराखंड विशेष कार्य बल के 'ऑपरेशन प्रहार' के तहत सूबे में अवैध हथियारों और फर्जी शस्त्र लाइसेंसों के खिलाफ चलाई जा रही मुहिम में एक और बहुत बड़ी सफलता हाथ लगी है। एसटीएफ की कुमाऊं विंग ने एक सटीक और गुप्त सूचना के आधार पर काशीपुर में दबिश देकर इस अंतरराज्यीय सिंडिकेट से जुड़े 11वें खूंखार आरोपित फईम अहमद को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने आरोपित के कब्जे से एक घातक (.32 बोर) सेमी ऑटोमैटिक पिस्टल और 9 जिंदा कारतूस बरामद किए हैं। इस हाई-प्रोफाइल नेटवर्क के खुलासे के बाद पूरे राज्य के पुलिस महकमे और दलालों के बीच हड़कंप मचा हुआ है।

एसएसपी एसटीएफ अजय सिंह ने मामले की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि गिरफ्तार किया गया आरोपित फईम अहमद बेहद शातिर किस्म का अपराधी है। शुरुआती जांच और पूछताछ में यह सनसनीखेज खुलासा हुआ है कि उसने उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर जिले के फर्जी पते और जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल कर यह शस्त्र लाइसेंस तैयार करवाया था। इस फर्जी लाइसेंस के दम पर उसने आसानी से अवैध हथियार और कारतूस भी खरीद लिए थे। वर्तमान में आरोपित के खिलाफ काशीपुर कोतवाली में भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है और उसे सलाखों के पीछे भेज दिया गया है। एसटीएफ की इस चौतरफा कार्रवाई से अवैध हथियार माफियाओं की कमर पूरी तरह टूट चुकी है। इस फर्जी लाइसेंस घोटाले में एसटीएफ अब तक कुल 11 सफेदपोश और शातिर अपराधियों को जेल की हवा खिला चुकी है। इस पूरे सिंडिकेट से अब तक 15 बेहद खतरनाक अवैध असलहे, 350 से अधिक जिंदा कारतूस और बड़ी संख्या में जाली लाइसेंस व सरकारी मुहरें बरामद की जा चुकी हैं। राज्य के अलग-अलग जिलों में इस गिरोह के खिलाफ तीन बड़ी एफआईआर दर्ज हैं, जिनकी कड़ियां आपस में जोड़ी जा रही हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी एसटीएफ अजय सिंह ने बेहद सख्त और कड़ा रुख अख्तियार किया है। उन्होंने सिंडिकेट से जुड़े सफेदपोशों, अपराधियों और बिचौलियों को खुली चुनौती देते हुए कहा, "इस देशद्रोही जैसे नेटवर्क में शामिल किसी भी दोषी या दलाल को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। एसएसपी ने राज्यभर के तमाम संदिग्ध और फर्जी लाइसेंस धारकों को अंतिम और कड़ी चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि जिन भी लोगों ने गलत तरीके से लाइसेंस बनवाए हैं, वे बिना देरी किए अपने हथियारों के साथ सीधे एसटीएफ के सामने आकर आत्मसमर्पण (सरेंडर) कर दें। यदि वे खुद सामने नहीं आते हैं, तो एसटीएफ उन्हें ढूंढ निकालेगी और उनके खिलाफ ऐसी कठोरतम कानूनी कार्रवाई की जाएगी जो मिसाल बनेगी। इसके साथ ही एसटीएफ ने आम जनता से भी अपील की है कि वे अपने आस-पास के ऐसे संदिग्धों की गुप्त सूचना तुरंत साझा करें, सूचना देने वाले का नाम पूरी तरह गुप्त रखा जाएगा। गैंग का पर्दाफाश करने और फईम को दबोचने वाली एसटीएफ की इस जांबाज टीम में मुख्य रूप से निरीक्षक अरुण कुमार व एमपी सिंह, उपनिरीक्षक जगदीप नेगी व प्रकाश भगत, हेड कांस्टेबल गोविंद बिष्ट व मोहित वर्मा, कांस्टेबल रवि बोरा, संजय कुमार और सुरेन्द्र कनवाल शामिल रहे। उच्चाधिकारियों ने इस पूरी टीम की पीठ थपथपाई है।