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तापमान बढ़ने पर उत्तराखंड के स्कूलों में 'वाटर बेल' पहल को मिल रहा है व्यापक जनसमर्थन

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उत्तराखंड में गर्मी के तेवर कड़े होने के साथ ही शासन ने आम जनमानस और विशेषकर स्कूली बच्चों को लू (हीटवेव) से बचाने के लिए पुख्ता रणनीति तैयार कर ली है। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने राज्य के सभी विद्यालयों में 'वाटर बेल' की व्यवस्था लागू करने के निर्देश दिए हैं। अब स्कूलों में निश्चित अंतराल पर घंटी बजाई जाएगी, जिसका उद्देश्य छात्र-छात्राओं को पढ़ाई के बीच पानी पीने के लिए प्रेरित करना है, ताकि उन्हें डिहाइड्रेशन (निर्जलीकरण) की समस्या न हो।

सचिवालय में हीटवेव एक्शन प्लान की समीक्षा बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने कहा कि बच्चों का स्वास्थ्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने जिलाधिकारियों और शिक्षा विभाग को निर्देशित किया कि यदि तापमान में अत्यधिक वृद्धि होती है, तो स्कूलों के समय में तत्काल बदलाव किया जाए। साथ ही, सभी कक्षाओं में वेंटिलेशन (हवा की आवाजाही) सुनिश्चित करने और स्कूलों में ओआरएस (ORS) के पैकेट व जरूरी दवाओं का स्टॉक रखने को कहा गया है। मुख्य सचिव ने सभी जिलों को अपना 'हीटवेव एक्शन प्लान' तैयार करने के निर्देश दिए हैं। संवेदनशील क्षेत्रों (हॉटस्पॉट्स) की पहचान कर वहां विशेष राहत केंद्र बनाए जाएंगे। खुले आसमान के नीचे काम करने वाले श्रमिकों के हितों की रक्षा के लिए उनके कार्य समय (Working Hours) में भी बदलाव किया जाएगा, ताकि उन्हें दोपहर की झुलसाने वाली धूप से बचाया जा सके। बैठक में पानी के संकट को लेकर भी कड़े फैसले लिए गए। मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि जिन क्षेत्रों में पानी की किल्लत है, वहां निर्माण कार्यों को अस्थायी रूप से रोका जा सकता है ताकि पेयजल की आपूर्ति बाधित न हो। परिवहन विभाग और नगर निकायों को बस स्टेशनों, रेलवे स्टेशनों और मुख्य बाजारों में शुद्ध पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि अस्पतालों में हीटवेव से प्रभावित मरीजों के लिए बेड आरक्षित रखे जाएं। इसके साथ ही पर्याप्त संख्या में आइस पैक और दवाइयों की उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा गया है। बढ़ती गर्मी के कारण बिजली की मांग में होने वाले इजाफे को देखते हुए ऊर्जा विभाग को वैकल्पिक बिजली आपूर्ति की योजना तैयार रखने के निर्देश भी दिए गए हैं।

प्रमुख निर्देश: एक नजर में
वाटर बेल: नियमित अंतराल पर घंटी बजेगी ताकि छात्र पानी पीना न भूलें।
वर्क ऑवर: मजदूरों के काम करने के समय में राहत के लिए बदलाव होगा।
पेयजल: सार्वजनिक स्थानों और स्टेशनों पर फ्री पेयजल की व्यवस्था।
मेडिकल: अस्पतालों में लू के मरीजों के लिए विशेष बेड और ओआरएस।
निर्माण कार्य: जल संकट वाले क्षेत्रों में निर्माण गतिविधियों पर रहेगी रोक।