झारखंड के सबसे प्रतिष्ठित और बड़े सरकारी अस्पताल 'राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान' (रिम्स) को आधुनिक, तकनीक-सक्षम और मरीज-केंद्रित चिकित्सा संस्थान के रूप में विकसित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल शुरू की गई है। स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह की अध्यक्षता में हुई एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में रिम्स के समग्र पुनर्विकास और डिजिटल बदलाव का ब्लू प्रिंट तैयार किया गया। बैठक में रिम्स के सभी विभागाध्यक्षों सहित आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के संयुक्त सचिव सह निदेशक दिनेश यादव, सीडीएसी और बीएसएनएल के आला अधिकारी मौजूद रहे।
अपर मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता रिम्स में पारदर्शी, सुगम और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित करना है। इसके लिए सभी संबंधित विभागों को समयबद्ध तरीके से योजनाओं को धरातल पर उतारने के कड़े निर्देश दिए गए हैं। इस महा-योजना के तहत रिम्स परिसर के भीतर उपलब्ध भूमि का अधिकतम उपयोग करने के लिए चरणबद्ध तरीके से पुराने और जर्जर भवनों को हटाया जाएगा। बैठक में पुराने बीएसएनएल कार्यालय भवन, सीनियर रेजिडेंट क्वार्टर और फॉरेंसिक मेडिसिन एंड टॉक्सिकोलॉजी विभाग के वर्तमान भवन को ध्वस्त कर उनके स्थान पर विश्वस्तरीय नई संरचनाएं खड़ी करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि एफएमटी विभाग की सेवाएं वर्तमान में जारी रहेंगी और उसी परिसर में विभाग के लिए नया अत्याधुनिक भवन बनाया जाएगा ताकि चिकित्सा अनुसंधान को नई गति मिल सके। इसके साथ ही, बढ़ती मरीज संख्या को देखते हुए आधुनिक सुविधाओं से लैस एक नए विशाल ओपीडी (बाह्य रोगी विभाग) भवन का निर्माण भी तेज किया जाएगा। रिम्स में इलाज की कतारों और लंबी कागजी प्रक्रियाओं से मुक्ति दिलाने के लिए डिजिटल हेल्थ इकोसिस्टम लागू किया जा रहा है। अस्पताल प्रबंधन सूचना प्रणाली के तहत अब मरीजों को 'डिजिटल डिस्चार्ज समरी' मिलेगी। डॉक्टरों के काम करने के तरीके को स्मार्ट बनाने के लिए टैबलेट आधारित डिजिटल कार्यप्रणाली शुरू की जा रही है। मरीजों के सभी मेडिकल रिकॉर्ड्स का डिजिटलीकरण किया जाएगा, जिससे बार-बार पुरानी पर्चियां ढूंढने का झंझट खत्म होगा। इसके अलावा, पूरे रिम्स परिसर को व्यापक सीसीटीवी सर्विलांस नेटवर्क से सुरक्षित किया जाएगा और बाहरी सुरक्षा के लिए मजबूत बाउंड्री वॉल का निर्माण होगा। रिम्स के जनसंपर्क अधिकारी डॉ. शिशिर कुमार महतो ने बताया कि बैठक में सिर्फ बुनियादी ढांचे पर ही नहीं, बल्कि ऑपरेशनल मैनेजमेंट पर भी गंभीर मंथन हुआ है। अस्पताल में उपलब्ध बेड और ऑपरेशन थिएटर के प्रभावी प्रबंधन के लिए एक समन्वित कार्ययोजना बनाई जा रही है। इसका सीधा फायदा सुदूर इलाकों से आने वाले उन गरीब मरीजों को मिलेगा, जिन्हें सर्जरी या बेड अलॉटमेंट के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता था। सरकार का लक्ष्य संसाधनों का बेहतर उपयोग कर मरीजों को समय पर इलाज देना है।

