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वीरता पुरस्कार विजेताओं को मिलने वाली एकमुश्त और वार्षिक आर्थिक सहायता में राज्य सरकार ने की वृद्धि

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देहरादून। कारगिल विजय दिवस के अवसर पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वीर सैनिकों और शहीदों के सम्मान में कई महत्वपूर्ण घोषणाएं करते हुए राज्य सरकार की सैनिक कल्याण नीति को और मजबूत करने का संदेश दिया। देहरादून स्थित गांधी पार्क के शहीद स्मारक पर पुष्पचक्र अर्पित कर कारगिल के अमर शहीदों को श्रद्धांजलि देने के बाद मुख्यमंत्री ने परमवीर चक्र से सम्मानित वीर सैनिकों के लिए दी जाने वाली अनुग्रह राशि को ₹1.50 करोड़ से बढ़ाकर ₹2 करोड़ करने की घोषणा की। इस दौरान उन्होंने कांग्रेस पर भी निशाना साधते हुए कहा कि दशकों तक सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास को नजरअंदाज किया गया, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में इन इलाकों को देश की प्राथमिकता बनाया गया है।

मुख्यमंत्री धामी ने कारगिल युद्ध को भारतीय सेना के अदम्य साहस, शौर्य और राष्ट्रभक्ति का अमर प्रतीक बताते हुए कहा कि वर्ष 1999 में 18 हजार फीट से अधिक ऊंचाई पर बेहद कठिन परिस्थितियों में भारतीय सैनिकों ने असाधारण वीरता का परिचय देते हुए दुश्मन को करारी शिकस्त दी। उन्होंने कहा कि कारगिल युद्ध में देश के 527 वीर जवानों ने सर्वोच्च बलिदान दिया, जिनमें उत्तराखंड के 75 वीर सपूत भी शामिल थे। यही कारण है कि उत्तराखंड केवल देवभूमि ही नहीं, बल्कि वीरभूमि के रूप में भी पूरे देश में अपनी पहचान रखता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश की सुरक्षा नीति पहले की तुलना में अधिक मजबूत, निर्णायक और आत्मविश्वास से भरपूर हुई है। उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ सख्त कार्रवाई, सीमावर्ती क्षेत्रों में रणनीतिक आधारभूत ढांचे के तेजी से विकास और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत की दिशा में उठाए गए कदमों को नए भारत की ताकत का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि वन रैंक-वन पेंशन, राष्ट्रीय युद्ध स्मारक और सैनिक कल्याण से जुड़े कई ऐतिहासिक फैसलों ने देश के सैनिकों और उनके परिवारों का सम्मान बढ़ाया है। इस दौरान मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद दशकों तक सीमावर्ती क्षेत्रों में सड़क, पुल और अन्य बुनियादी ढांचे के विकास को यह कहकर टाल दिया गया कि इससे दुश्मन को फायदा मिल सकता है। उन्होंने कहा कि इस सोच के कारण 60-70 वर्षों तक सीमांत क्षेत्रों का विकास ठप रहा। लेकिन वर्ष 2014 के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने इस सोच को बदलते हुए नेलांग, मलारी, जादूंग, नीति और माणा जैसे सीमांत क्षेत्रों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ा। उन्होंने कहा कि अब "अंतिम गांव" की अवधारणा बदल चुकी है और माणा सहित सभी सीमांत गांवों को "प्रथम गांव" के रूप में विकसित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री धामी ने बताया कि राज्य सरकार सैनिकों, पूर्व सैनिकों और शहीद परिवारों के कल्याण के लिए लगातार नए निर्णय ले रही है। उन्होंने कहा कि शहीदों के आश्रितों को दी जाने वाली अनुग्रह राशि ₹10 लाख से बढ़ाकर ₹50 लाख कर दी गई है। इसके अलावा वीरता पुरस्कार विजेताओं को मिलने वाली एकमुश्त और वार्षिक सहायता राशि में भी वृद्धि की गई है। उन्होंने बताया कि बलिदानी परिवारों के एक सदस्य को सरकारी सेवा में समायोजन, नौकरी के लिए आवेदन की समय-सीमा दो वर्ष से बढ़ाकर पांच वर्ष करना, शहीद परिवारों की बेटियों के विवाह के लिए आर्थिक सहायता, वीरता पुरस्कार विजेताओं को उत्तराखंड परिवहन निगम की बसों में निशुल्क यात्रा, पूर्व सैनिकों को संपत्ति खरीद पर स्टांप शुल्क में छूट तथा शस्त्र लाइसेंस प्रक्रिया को सरल बनाने जैसे कई महत्वपूर्ण निर्णय लागू किए जा चुके हैं। मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की कि सैनिकों और पूर्व सैनिकों से जुड़े जिला अदालतों में लंबित भूमि धोखाधड़ी के मामलों के त्वरित निस्तारण के लिए विशेष प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि देहरादून के गुनियाल गांव में राज्य के 'पांचवें धाम' सैन्य धाम का निर्माण अंतिम चरण में है। यह धाम राज्य के प्रत्येक शहीद के घर से लाई गई पवित्र मिट्टी से बनाया जा रहा है और आने वाली पीढ़ियों के लिए राष्ट्रभक्ति, त्याग और बलिदान का प्रेरणा केंद्र बनेगा। अग्निवीरों के भविष्य को लेकर भी मुख्यमंत्री ने बड़ा ऐलान किया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड देश का पहला 'अग्निवीर रोजगार सेल' स्थापित करने जा रहा है। इसके माध्यम से अग्निवीरों को उत्तराखंड पुलिस, वन विभाग और अन्य राज्य सेवाओं में प्राथमिकता देने के साथ-साथ कौशल विकास प्रशिक्षण, स्वरोजगार, होमस्टे योजनाओं और सीमांत क्षेत्रों में विशेष सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। कारगिल विजय दिवस के अवसर पर हुए इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कारगिल शहीदों के परिजनों को सम्मानित करते हुए कहा कि देश की सुरक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले वीरों का सम्मान और उनके परिवारों का कल्याण राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल रहेगा। सरकार सैनिकों के सम्मान, सुरक्षा और उनके परिवारों के भविष्य को मजबूत करने के लिए हर संभव कदम उठाती रहेगी।