दो सौ सीसीटीवी कैमरों से होगी यात्रा की निगरानी, 14 एसओएस प्वाइंट सक्रिय, इन पर रहेगा फोकस

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रुद्रप्रयाग। आगामी केदारनाथ धाम यात्रा को सुरक्षित, सुगम और व्यवस्थित बनाने के लिए जिला प्रशासन ने इस बार अत्याधुनिक हाईटेक सुरक्षा कवच तैयार किया है। रुद्रप्रयाग से केदारनाथ धाम तक पूरे यात्रा मार्ग पर लगभग 200 हाई रेजोल्यूशन सीसीटीवी कैमरों से निरंतर निगरानी रखी जाएगी। इनमें से 181 कैमरे पहले से ही सक्रिय हैं, जो यात्रा मार्ग, मुख्य बाजारों, संवेदनशील भूस्खलन क्षेत्रों, हेलीपैड और पैदल मार्ग की हर गतिविधि पर पैनी नजर रख रहे हैं।पैदल मार्ग पर विशेष निगरानी गौरीकुंड से केदारनाथ तक के संवेदनशील पैदल मार्ग पर लगभग 16 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। साथ ही पूरे यात्रा रूट पर कुल 14 एसओएस प्वाइंट सक्रिय किए गए हैं। इनमें गौरीकुंड से केदारनाथ के बीच 5 प्रमुख प्वाइंट शामिल हैं गौरीकुंड, जंगलचट्टी, भीमबली, लिनचोली और रुद्रा प्वाइंट। रुद्रप्रयाग से गौरीकुंड तक 11 अन्य स्थानों पर भी एसओएस सेंटर स्थापित किए गए हैं, जिनमें जवाड़ी बाईपास सहित महत्वपूर्ण जगहें शामिल हैं।

इन एसओएस प्वाइंट्स की सबसे बड़ी खासियत यह है कि नेटवर्क न होने पर भी यात्री सीधे जिला मुख्यालय स्थित आपदा कंट्रोल रूम से संपर्क कर सकते हैं। रियल टाइम लोकेशन ट्रेसिंग की सुविधा से राहत एवं बचाव कार्य तेजी से संभव हो सकेगा। प्रशासन ने यात्रा के दौरान 5 ड्रोन कैमरों का भी उपयोग करने का निर्णय लिया है। इसके अलावा यात्रा मार्ग पर संचालित होने वाले लगभग 5000 घोड़ा-खच्चरों पर बारकोड, टोकन और चिप लगाई जा रही है, जिससे उनकी आवाजाही की भी निरंतर मॉनिटरिंग की जा सकेगी। केदारनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर ट्रैफिक व्यवस्था और भीड़ प्रबंधन के लिए सीसीटीवी कैमरों का विशेष उपयोग किया जाएगा। पुलिस इन कैमरों के माध्यम से जाम और भीड़ की स्थिति का तत्काल आकलन कर निर्णय ले सकेगी। गौरीकुंड, सोनप्रयाग से लेकर केदारनाथ धाम तक इस बार 300 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात किए जाएंगे, जो सुरक्षा व्यवस्था, भीड़ प्रबंधन और आपात स्थिति से निपटने के लिए मुस्तैद रहेंगे। चारधाम यात्रा के दौरान जिला आपदा कंट्रोल रूम 24 घंटे सक्रिय रहेगा। यहां पांच कर्मी लगातार ड्यूटी पर रहेंगे। आपदा प्रबंधन अधिकारी नंदन सिंह रजवार ने बताया, “पूरे यात्रा रूट पर चौबीसों घंटे कैमरों के जरिए लगातार नजर रखी जा रही है और कंट्रोल रूम पूरी तरह सक्रिय है, ताकि श्रद्धालुओं को सुरक्षित और सुगम यात्रा अनुभव मिल सके।” यह व्यापक सुरक्षा व्यवस्था भूस्खलन, भीड़, दुर्घटना और मौसम संबंधी किसी भी आपात स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करेगी। प्रशासन का मानना है कि सीसीटीवी, एसओएस प्वाइंट, ड्रोन और बारकोड जैसी आधुनिक तकनीकों के उपयोग से केदारनाथ यात्रा पिछले वर्षों की तुलना में ज्यादा सुरक्षित और सुव्यवस्थित होगी। लाखों श्रद्धालु हर वर्ष केदारनाथ धाम पहुंचते हैं। इस बार प्रशासन ने उनकी सुरक्षा और सुविधा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। यात्रा शुरू होने से पहले सभी व्यवस्थाओं का अंतिम परीक्षण किया जा रहा है।