रक्षा भू-सूचना अनुसंधान स्थापना (डीजीआरई) ने उत्तराखंड के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में हिमस्खलन को लेकर चेतावनी जारी की है। जारी बुलेटिन के अनुसार, राज्य के उत्तरकाशी, चमोली और पिथौरागढ़ जिलों के तीन हजार मीटर से अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में खतरे का स्तर-दो (मध्यम खतरा) घोषित किया गया है। इन क्षेत्रों में छोटे हिमस्खलन की संभावना जताई गई है। वहीं, रुद्रप्रयाग और बागेश्वर जिलों के लिए खतरे का स्तर-एक (कम खतरा) बताया गया है।
डीजीआरई ने पर्यटकों, स्थानीय निवासियों और ट्रेकिंग करने वालों को ऊंचाई वाले इलाकों में अनावश्यक आवाजाही से बचने की सलाह दी है। प्रशासन को इन क्षेत्रों में निरंतर निगरानी रखने और पुराने हिमस्खलन वाले रास्तों पर विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि हालिया बर्फबारी और मौसम में आए बदलाव के कारण स्नो कवर अस्थिर हो सकता है, जिससे छोटे पैमाने पर हिमस्खलन की घटनाएं हो सकती हैं। मौसम विज्ञान केंद्र देहरादून ने भी 23 मार्च को उत्तरकाशी, चमोली, बागेश्वर, रुद्रप्रयाग और पिथौरागढ़ जिलों में बिजली चमकने के साथ 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाओं का येलो अलर्ट जारी किया था। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से प्रदेश में यह अस्थिरता देखने को मिल रही है।आने वाले दिनों में 27 मार्च तक पूरे प्रदेश में मौसम बदला-बदला बना रहेगा। रविवार को देहरादून का अधिकतम तापमान सामान्य से एक डिग्री कम 27.5 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया, जबकि न्यूनतम तापमान दो डिग्री कम 12.6 डिग्री रहा। पर्वतीय क्षेत्रों में तापमान में और अधिक गिरावट दर्ज की गई। प्रशासन ने सभी जिलाधिकारियों को सतर्क रहने और जरूरत पड़ने पर पर्यटकों को ऊंचाई वाले क्षेत्रों से वापस लौटाने के निर्देश दिए हैं। पर्यटकों से अपील की गई है कि वे मौसम संबंधी अपडेट नियमित रूप से चेक करें और बिना तैयारी के उच्च हिमालयी क्षेत्रों की यात्रा न करें। हिमस्खलन जैसी प्राकृतिक आपदाओं से बचाव के लिए स्थानीय लोगों और यात्रियों को जागरूक रहने की जरूरत है।

