नीतू लक्ष्मी की नई भूमिका पर चर्चा तेज: उत्तराखंड वन विभाग में मंगलवार को होने वाले बड़े फैसले

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देहरादून। उत्तराखंड वन विभाग में लंबे समय से लंबित भारतीय वन सेवा (आईएफएस ) अधिकारियों के तबादलों का इंतजार अब खत्म होने वाला है। सिविल सर्विस बोर्ड (CSB) की महत्वपूर्ण बैठक मंगलवार को आयोजित होने जा रही है, जिसमें विभागीय स्तर पर तैयार किए गए तबादला प्रस्ताव पर अंतिम मुहर लगने की पूरी संभावना है।

वन विभाग में कई महत्वपूर्ण पद लंबे समय से खाली पड़े हैं, जबकि कई वरिष्ठ अधिकारी बिना स्थाई जिम्मेदारी के कार्य कर रहे हैं। ऐसी स्थिति में विभागीय प्रशासनिक संतुलन बनाए रखना चुनौती बन गया था। यही कारण है कि पिछले कई महीनों से तबादला सूची को लेकर मंथन चल रहा था और अब यह प्रक्रिया निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। विभाग ने बैठक के लिए व्यापक तैयारी कर ली है। विभिन्न पदों के लिए संभावित नामों की सूची तैयार कर ली गई है और अधिकारियों की विभागीय आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए प्रस्ताव अंतिम रूप दे दिया गया है। सूत्रों के अनुसार, इस सूची में ज्यादा बदलाव की संभावना नहीं है और बोर्ड द्वारा इसे लगभग जस का तस मंजूरी मिल सकती है। इसका मतलब है कि जिन अधिकारियों के नाम प्रस्तावित हैं, उन्हें नई जिम्मेदारियां मिलने का रास्ता लगभग साफ हो चुका है। विभाग के अंदर दो बड़ी चुनौतियां हैं। एक, खाली पड़े महत्वपूर्ण पदों को भरना और दूसरा, बिना जिम्मेदारी के बैठे अधिकारियों को उपयुक्त तैनाती देना। इसी को ध्यान में रखकर इस बार तबादला सूची तैयार की गई है। खासतौर पर एपीसीसीएफ स्तर के अधिकारी सुरेंद्र मेहरा, सीएफ स्तर के चंद्रशेखर सनवाल और नीतू लक्ष्मी की नजरें सबसे ज्यादा इस बैठक पर टिकी हुई हैं। ये तीनों अधिकारी हाल ही में प्रतिनियुक्ति से उत्तराखंड लौटे हैं, लेकिन अब तक उन्हें कोई स्थाई जिम्मेदारी नहीं सौंपी गई है। माना जा रहा है कि इस तबादला सूची में इन्हें प्रमुख पदों पर नियुक्त किया जाएगा। इसी तरह आईएफएस अधिकारी विनय भार्गव का नाम भी चर्चा में है, जो फिलहाल बिना तैनाती के हैं। उम्मीद है कि उन्हें भी इस सूची में शामिल कर नई जिम्मेदारी दी जाएगी।

इस बार बड़े पैमाने पर तबादलों की संभावना कम बताई जा रही है। विभाग मुख्यालय स्तर पर सीमित फेरबदल करने के पक्ष में है। इसके तहत कैंपा,प्रशासन, मानव संसाधन और अन्य महत्वपूर्ण शाखाओं में अधिकारियों की तैनाती की संभावना है। इन पदों पर लंबे समय से स्थायित्व की कमी महसूस की जा रही थी, जिसे अब दूर करने की कोशिश की जा रही है। पीसीसीएफ स्तर के कुछ पदों पर भी बदलाव संभव हैं। कई पद अभी प्रभार के आधार पर संचालित हो रहे हैं। विभाग इन पदों पर स्थाई नियुक्ति देने पर विचार कर रहा है, ताकि निर्णय प्रक्रिया में स्थिरता आए और कार्यों का बेहतर निष्पादन हो सके। फील्ड स्तर पर हालांकि इस बार बड़े तबादलों की उम्मीद नहीं है। खासकर डीएफओ स्तर पर किसी बड़े बदलाव की संभावना नहीं रखी जा रही है। विभाग का मानना है कि फील्ड में स्थिरता बनाए रखना जरूरी है, ताकि चल रहे विकास कार्यों और वन संरक्षण की गतिविधियों पर कोई नकारात्मक प्रभाव न पड़े।डीएफओ स्तर के तबादले बाद में अलग से किए जाने की योजना है। वन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी अब सिविल सर्विस बोर्ड की बैठक के फैसले का इंतजार कर रहे हैं। बैठक के बाद तस्वीर पूरी तरह साफ हो जाएगी और अधिकारियों को उनकी नई जिम्मेदारियां मिल जाएंगी। इससे न केवल विभाग की कार्यकुशलता बढ़ेगी, बल्कि प्रशासनिक ढांचे को भी नई मजबूती मिलेगी।