उच्च शिक्षा योजनाओं की समीक्षा के बाद हेमंत सोरेन ने तेज सुधार अभियान का किया ऐलान

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रांची। झारखंड की उच्च शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक, गुणवत्तापूर्ण और रोजगारोन्मुख बनाने की दिशा में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बड़ा फैसला लिया है। सोमवार को उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि अगले 15 दिनों के भीतर झारखंड विश्वविद्यालय सेवा आयोग को पूरी तरह सक्रिय किया जाए। इसके साथ ही निजी कोचिंग संस्थानों और उच्च शिक्षा से जुड़े संस्थानों की निगरानी के लिए कोचिंग रेगुलेटरी अथॉरिटी को भी 15 दिनों के भीतर कार्यरत करने के निर्देश दिए गए। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि झारखंड को केवल खनिज संपदा का राज्य नहीं, बल्कि ज्ञान और नवाचार का केंद्र बनाना सरकार की प्राथमिकता है।

बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य को "माइनिंग से माइंड" की दिशा में आगे बढ़ाने में उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका होगी। उन्होंने सभी योजनाओं के प्रभावी और समयबद्ध क्रियान्वयन पर विशेष जोर देते हुए अधिकारियों को जवाबदेही के साथ काम करने के निर्देश दिए। समीक्षा बैठक में गुरुजी स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड (GSCC) योजना की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि अब तक 2,888 पात्र विद्यार्थियों को ऋण स्वीकृत किया जा चुका है, जबकि 243 छात्र-छात्राओं को विभिन्न बैंकों के माध्यम से लगभग 64 करोड़ रुपये का शिक्षा ऋण उपलब्ध कराया गया है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि आर्थिक तंगी के कारण कोई भी छात्र उच्च शिक्षा से वंचित न रहे और अधिक से अधिक पात्र विद्यार्थियों तक इस योजना का लाभ पहुंचाया जाए। बैठक में बीआईटी सिंदरी को यूनिटरी यूनिवर्सिटी के रूप में विकसित करने पर सैद्धांतिक सहमति बनी। मुख्यमंत्री ने इसके लिए आवश्यक विधेयक तैयार करने और संस्थान के डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन की विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। इसके अलावा राज्य के सभी विश्वविद्यालयों में पीपीपी मॉडल के तहत कंप्यूटर आधारित परीक्षा केंद्र स्थापित करने के प्रस्ताव को भी सैद्धांतिक मंजूरी दी गई। इससे प्रतियोगी परीक्षाओं के आयोजन में पारदर्शिता और सुविधा बढ़ने की उम्मीद है। मुख्यमंत्री ने तकनीकी शिक्षा को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप बनाने पर भी जोर दिया। उन्होंने सरकारी पॉलिटेक्निक और तकनीकी संस्थानों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, इलेक्ट्रिक व्हीकल, सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग, लॉजिस्टिक्स, टेक्सटाइल डिजाइन और अन्य उभरती तकनीकों से जुड़े रोजगारपरक पाठ्यक्रम शुरू करने के निर्देश दिए। साथ ही नौ जिलों में तकनीकी शिक्षा क्लस्टर विकसित करने की योजना को तेजी से आगे बढ़ाने को कहा। बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि शैक्षणिक सत्र 2026-27 से विश्वविद्यालयों में लाइव ऑनलाइन क्लास शुरू करने की तैयारी तेज की जाएगी। मुख्यमंत्री ने मरांग गोमके जयपाल सिंह मुंडा विदेश छात्रवृत्ति, मानकी मुंडा छात्रवृत्ति सहित अन्य छात्रवृत्ति योजनाओं का लाभ समय पर विद्यार्थियों तक पहुंचाने पर भी विशेष जोर दिया। अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि राज्य में पहली बार झारखंड रोबोटिक्स फेस्टिवल का आयोजन शुरू किया गया है, जिसका उद्देश्य युवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और रोबोटिक्स जैसी अत्याधुनिक तकनीकों से जोड़ना है। मुख्यमंत्री ने इस पहल की सराहना करते हुए ऐसे कार्यक्रमों का दायरा और व्यापक बनाने के निर्देश दिए। सरकार का मानना है कि इन फैसलों से झारखंड की उच्च शिक्षा व्यवस्था में व्यापक बदलाव आएगा। आधुनिक तकनीक, डिजिटल शिक्षा, पारदर्शी भर्ती व्यवस्था और रोजगारोन्मुख पाठ्यक्रमों के जरिए राज्य के युवाओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहतर अवसर उपलब्ध होंगे। शिक्षा क्षेत्र में उठाए गए ये कदम झारखंड को ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ाने की मजबूत पहल माने जा रहे हैं।