गोपनीय मिशन के तहत परिवार से मिलने आए 20 लाख के इनामी विद्रोही रवींद्र गंझू लातेहार में फंसे

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लातेहार। झारखंड में लाल आतंक के सफाये की दिशा में सुरक्षा बलों को अब तक की सबसे बड़ी और ऐतिहासिक कामयाबी हाथ लगी है। लातेहार पुलिस और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल ने एक साझा ऑपरेशन चलाकर 18 पुलिसकर्मियों की शहादत के मुख्य गुनहगार और 20 लाख रुपये के इनामी कुख्यात माओवादी रीजनल कमेटी सदस्य रवींद्र गंझू को गिरफ्तार कर लिया है। 16 सालों से पुलिस की आंखों में धूल झोंक रहा यह खूंखार कमांडर लातेहार जिले के चंदवा थाना क्षेत्र अंतर्गत अपने पैतृक गांव हेसला बांझीटोला में बेहद गोपनीय तरीके से छिपा हुआ था। पुलिस ने घेराबंदी कर उसे रंगे हाथों दबोचा और उसके पास से एक घातक एके-56 राइफल, एक पिस्टल, एक अन्य राइफल तथा 239 जिंदा कारतूस सहित भारी मात्रा में युद्धक सामग्री बरामद की है।

मंगलवार को लातेहार में आयोजित एक हाई-प्रोफाइल प्रेस वार्ता में एसपी कुमार गौरव ने इस पूरे ऑपरेशन का खुलासा किया। उन्होंने बताया कि गिरफ्तार माओवादी रवींद्र गंझू पर सिर्फ सुरक्षाबलों पर हमले ही नहीं, बल्कि कई बेगुनाह ग्रामीणों की बेरहमी से हत्या करने का भी संगीन आरोप है। उसके खिलाफ लातेहार, गुमला, लोहरदगा, पलामू और राजधानी रांची के विभिन्न थानों में 154 से अधिक नक्सली हिंसा के मामले दर्ज हैं। वर्ष 2019-20 के दौरान इस इलाके में रवींद्र गंझू का खौफ चरम सीमा पर था। हाल के दिनों में पुलिस के चौतरफा प्रहार के कारण जब राज्य से लगभग नक्सलवाद का सफाया हो गया, तब यह इकलौता शीर्ष कमांडर था जो पुलिस की गिरफ्त से बाहर रहकर संगठन को दोबारा खड़ा करने की फिराक में था। एसपी कुमार गौरव को सोमवार देर रात एक सटीक गुप्त सूचना मिली कि रवींद्र गंझू बेहद छिपते-छिपाते चंदवा स्थित अपने घर आया हुआ है। सूचना की गंभीरता को देखते हुए बिना वक्त गंवाए एसपी के निर्देश पर पुलिस और अर्धसैनिक बलों की एक संयुक्त टीम का गठन किया गया। सुरक्षा बलों ने आधी रात को ही उसके पूरे गांव और घर को चारों तरफ से घेर लिया ताकि उसे भागने का कोई मौका न मिले। सुबह तड़के जब घर के भीतर सघन सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया, तो खुद को पूरी तरह घिरा देख रवींद्र गंझू ने आत्मसमर्पण कर दिया। तलाशी के दौरान उसके गुप्त ठिकाने से 1 एके-56 राइफल, 1 पिस्टल, 1 अन्य राइफल, 239 गोलियां और माओवादी साहित्य बरामद किया गया। प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद सीआरपीएफ के डीआईजी पंकज कुमार ने साफ शब्दों में कहा कि रवींद्र गंझू की गिरफ्तारी के बाद अब राज्य में माओवादी संगठन की रीढ़ पूरी तरह टूट चुकी है। उन्होंने बचे-खुचे नक्सलियों को सख्त लहजे में चेतावनी देते हुए कहा अब पूरे क्षेत्र में गिनती के एक-दो नक्सली ही बचे हैं, जिनके खिलाफ हमारा सर्च ऑपरेशन लगातार जारी है। उनके पास अब केवल दो ही विकल्प बचे हैं या तो वे तुरंत पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौट आएं, अन्यथा वे मुठभेड़ में मारे जाएंगे। पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार नक्सली रवींद्र गंझू से गुप्त स्थान पर कड़ाई से पूछताछ की जा रही है, जिसमें उसने संगठन के नेटवर्क, डंप किए गए हथियारों और लेवी (रंगदारी) से जुड़े कई बेहद महत्वपूर्ण और चौंकाने वाले राज उगले हैं। इन सुरागों के आधार पर पुलिस की टीमें अन्य ठिकानों पर भी छापेमारी कर रही हैं। इस बड़े और बेहद जोखिम भरे नक्सल विरोधी अभियान को सफलता तक पहुंचाने में कोबरा 209 बटालियन के डिप्टी कमांडेंट दीपक कुमार, लातेहार पुलिस के सब इंस्पेक्टर रितेश कुमार राव और रितेश तिग्गा सहित कई जांबाज जवानों ने अपनी जान हथेली पर रखकर मुख्य भूमिका निभाई, जिनकी महकमे द्वारा उच्च स्तर पर सराहना की जा रही है।