डिजिटल बैंकिंग फ्रॉड का नया पैंतरा: ओटीपी मिटाकर विधवा महिला को भनक तक नहीं लगने दी

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रांची। राजधानी रांची के सिल्ली थाना क्षेत्र से धोखाधड़ी और जालसाजी का एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने इंसानियत को शर्मसार कर दिया है। यहाँ एक बेसहारा विधवा महिला को उसके पति की मौत के बाद बैंक और एलआईसी में फंसे पैसे दिलाने के नाम पर एक शातिर पति-पत्नी (दंपत्ति) ने 60 लाख रुपये का चूना लगा दिया। पीड़िता को जब अपनी जमापूंजी लुटने का अहसास हुआ, तो उसके पैरों तले जमीन खिसक गई। इस संबंध में पीड़ित महिला ने सिल्ली थाने में आरोपी दंपत्ति के खिलाफ नामजद प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराई है। पुलिस ने मामला दर्ज कर तकनीकी और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर जांच शुरू कर दी है।

पुलिस को दी गई शिकायत के अनुसार, सिल्ली की रहने वाली नमिता महतो के पति सुभाष चंद्र महतो के आकस्मिक निधन के बाद वे पूरी तरह टूट चुकी थीं। पति की मौत के बाद उनके बैंक खातों और एलआईसी से जुड़े पैसों के निपटारे की प्रक्रिया चल रही थी। इसी दौरान क्षेत्र के ही रहने वाले सत्य प्रकाश और उसकी पत्नी पूनम कुमारी ने नमिता से संपर्क बढ़ाया। आरोपियों ने खुद को बेहद प्रभावशाली, रसूखदार और कानूनी मामलों का विशेषज्ञ बताकर नमिता का भरोसा जीत लिया। नमिता को लगा कि दुख की इस घड़ी में कोई उनकी सच्ची मदद कर रहा है, लेकिन उन्हें भनक तक नहीं थी कि वे एक सोची-समझी साजिश का शिकार हो रही हैं। भरोसा जीतने के बाद आरोपियों ने कानूनी प्रक्रियाओं का बहाना बनाकर नमिता के जरूरी व्यक्तिगत दस्तावेज जैसे पासबुक, फोटोग्राफ और अन्य पहचान पत्र अपने कब्जे में ले लिए। इसके बाद आरोपियों ने पीड़िता की जानकारी के बिना उनके मोबाइल फोन में गुप्त रूप से बैंकिंग ऐप डाउनलोड कर उसे एक्टिवेट कर लिया। आरोपियों ने चालाकी से उस ऐप का पासवर्ड और लॉगिन पिन भी अपने पास सुरक्षित रख लिया, जिससे उन्हें पीड़िता के बैंक खाते का पूरा एक्सेस मिल गया। शिकायत में नमिता ने आरोप लगाया है कि आरोपियों ने उनके एसबीआई अकाउंट से कई किश्तों में बड़ी रकम अपने खातों में ट्रांसफर कर ली। पीड़िता को इस धोखाधड़ी की भनक इसलिए नहीं लगी क्योंकि आरोपी पैसे ट्रांसफर करने के बाद नमिता के मोबाइल से आने वाले बैंक के अलर्ट मैसेज और ओटीपी  को तुरंत डिलीट कर देते थे। इस महाठगी की शुरुआत तब हुई जब एलआईसी से संबंधित एक बड़ी रकम नमिता के खाते में आई थी, जिसे बैंक ने स्वतः ही फिक्स्ड डिपॉजिट  में बदल दिया था। इसी राशि पर आरोपियों की गिद्ध दृष्टि पड़ी। एफआईआर के मुताबिक, 6 मार्च 2023 को पहली बार में 4.12 लाख रुपये ट्रांसफर किए गए थे। इसके बाद धीरे-धीरे करके कुल 49.77 लाख रुपये का अवैध डिजिटल ट्रांसफर कर लिया गया। इतना ही नहीं, आरोपियों ने काम कराने और कथित 'कानूनी फीस' के नाम पर अलग से 9.50 लाख रुपये भी ऐंठ लिए। कुल मिलाकर लगभग 60 लाख रुपये की ठगी का शिकार होने के बाद पीड़िता ने सिल्ली थाने की शरण ली है। मामले की गंभीरता को देखते हुए सिल्ली पुलिस ने सत्य प्रकाश और पूनम कुमारी के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि बैंक से जुड़े इस बड़े फ्रॉड में डिजिटल ट्रांजैक्शन के विवरण (बैंक स्टेटमेंट) की गहराई से स्क्रूटनी की जा रही है। आरोपियों के बैंक खातों को फ्रीज करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है और जल्द ही दोनों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।