उत्तराखंड में मौसम के मिजाज ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। बारिश न होने के कारण पहाड़ से लेकर मैदान तक सूखी ठंड का असर महसूस किया जा रहा है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि अगले कुछ समय तक मौसम ऐसा ही बना रह सकता है। बारिश न होने के चलते दिन और रात के तापमान में अंतर स्पष्ट दिख रहा है. सुबह और शाम ठंड बढ़ रही है। वहीं, मैदानी इलाकों में कोहरा छाने लगा है। मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार अधिकतम तापमान में गिरावट के कारण दिन के समय भी ठंड का अहसास हो रहा है। रात का न्यूनतम तापमान कम होने के कारण रात में ठंड बढ़ गई है।
बात अगर चमोली जनपद की करें तो इन दिनों पूरे जनपद में कड़ाके की ठंड पड़ रही है। रात में यहां तापमान माइनस 10 डिग्री तक पहुंच रहा है। इस कारण यहां बहने वाले गाड़-गदेरे और झरने जम गए हैं। बर्फ में तब्दील पानी की विभिन्न तरह की आकृतियां देखकर यहां पहुंचने वाले पर्यटक भी खासे उत्साहित नजर आ रहे हैं. बारिश के न होने से पूरे जनपद में कड़ाके की ठंड पड़ रही है। लगातार पाला गिरने से तापमान में गिरावट हो रही है। तापमान माइनस 10 डिग्री तक पहुंचने से यहां बहने वाले नदी-नाले का पानी जम गया है। इस नजारे को देखने के लिए पर्यटक देश के विभिन्न हिस्सों से यहां पहुंच रहे हैं। चमोली में स्थित सिखों के पवित्र धार्मिक तीर्थ स्थल हेमकुंड साहिब का सरोवर भी पूरी तरह से जम गया है। क्षेत्र में कड़ाके की ठंड पड़ रही है। इस वर्ष नवंबर में हुई पहली बर्फबारी के बाद से दोबारा बर्फ नहीं गिरी है। हेमकुंड साहिब के पवित्र सरोवर के आसपास के क्षेत्रों में जमी हुई परतें दिखाई दे रही हैं। इस साल हेमकुंड साहिब के कपाट शीतकाल के लिए 10 अक्टूबर को दोपहर एक बजे के बाद बंद कर दिए गए थे। ठंड से बेहाल स्थानीय लोग अब बारिश और बर्फबारी का इंतजार कर रहे हैं. पहाड़ों में यह माना जाता है कि अच्छी बारिश या बर्फबारी के बाद ठंड का असर कम हो जाता है। मौसम में राहत मिलती है। फिलहाल, चमोली के पर्वतीय इलाकों में पड़ रही भीषण ठंड ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है।

