उत्तराखंड पर्यटन के लिए हरित विकास मॉडल पर सीएम धामी का जोर

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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नेहरू पर्वतारोहण संस्थान में आयोजित विंटर टूरिज्म कॉन्क्लेव में शिरकत कर प्रदेश में पर्यटन विकास को लेकर सरकार की प्राथमिकताओं को स्पष्ट किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड जैसे संवेदनशील हिमालयी राज्य में पर्यटन को बढ़ावा देते समय इकॉलोजी और इकोनॉमी के बीच संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी है। सरकार का प्रयास है कि विकास के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण से कोई समझौता न हो।

सीएम धामी ने कहा कि उत्तराखंड की प्राकृतिक सुंदरता, बर्फ से ढकी चोटियां, साहसिक पर्यटन और समृद्ध संस्कृति प्रदेश को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर एक अलग पहचान दिलाती हैं। इसे ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने पर्वतारोहण, ट्रेकिंग और एडवेंचर टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए अनुमति प्रक्रिया को सरल बनाया है। अब सिंगल विंडो सिस्टम के माध्यम से पर्यटक और आयोजक आसानी से जरूरी अनुमतियां प्राप्त कर सकते हैं, जिससे समय और संसाधनों की बचत होगी। मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि पर्यटन का वास्तविक लाभ तभी मिलेगा जब इसका दायरा शहरी क्षेत्रों से आगे बढ़कर ग्रामीण और सीमांत क्षेत्रों तक पहुंचे। इससे स्थानीय लोगों को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे और पलायन जैसी गंभीर समस्या पर भी प्रभावी अंकुश लगाया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि राज्य की महिलाएं और युवा यदि पर्यटन से जुड़ते हैं तो वे पहाड़ की समृद्ध संस्कृति, हस्तशिल्प, स्थानीय उत्पादों और खानपान को देश-दुनिया के सामने प्रस्तुत कर सकते हैं। विंटर टूरिज्म कॉन्क्लेव में विभिन्न विशेषज्ञों, पर्यटन उद्यमियों और साहसिक गतिविधियों से जुड़े लोगों ने भी अपने विचार साझा किए। मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार पर्यटन को चारधाम यात्रा तक सीमित न रखते हुए विंटर टूरिज्म, साहसिक पर्यटन और ईको-टूरिज्म के नए आयाम विकसित करने के लिए लगातार काम कर रही है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड को सालभर पर्यटन का केंद्र बनाने की दिशा में यह कॉन्क्लेव एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।