जोशीमठ जंगल आग कई प्रयासों के बावजूद जारी, वन टीमों ने वैकल्पिक रणनीति अपनाई

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उत्तराखंड के पहाड़ों में ठंड के सितम के बीच पर्यावरण को गहरा नुकसान पहुंचाने वाली घटनाएं घटी रही हैं। इस जनवरी माह में उच्च हिमालयी इलाकों में बर्फबारी का आलम आम होना चाहिए था, लेकिन पर्यावरण के बिगड़ते संतुलन के कारण जंगलों में आग की घटनाएं रिकॉर्ड की जा रही हैं। इसने पर्यावरणविदों और पर्यावरण प्रेमियों को चिंता में डाल दिया है। आग की ताजा तस्वीरें चमोली जिले के जोशीमठ से सामने आई हैं। 

चमोली जिले के जोशीमठ विकासखंड में जंगलों में लगी भीषण आग से स्थिति गंभीर बनी हुई है। नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क वन प्रभाग क्षेत्र के गोविंदघाट के पास भ्यूंडार घाटी के जंगलों में 5 दिन से भीषण आग धधक रही है। आग से पूरे क्षेत्र में धुएं का घना गुबार फैल गया है। इस आग की चपेट में आकर करोड़ों रुपए की बहुमूल्य वन संपदा जलकर राख हो रही है। इसके साथ ही, क्षेत्र में पाए जाने वाले दुर्लभ वन्य जीवों, औषधीय पौधों और समृद्ध जैव विविधता के अस्तित्व पर भी गंभीर खतरा मंडरा रहा है। लगातार फैलती आग से पर्यावरणीय संतुलन बिगड़ने की आशंका जताई जा रही है। दुर्गम और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद, वन विभाग की टीमें हालात से निपटने में जुटी हुई हैं। आग प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचने के लिए वन विभाग द्वारा नदी पर एक वैकल्पिक अस्थायी पुल का निर्माण किया गया है। ताकि, अग्निशमन कार्य में तेजी लाई जा सके। 

दूसरी तरफ तेज हवाएं, धधकती आग को तेजी से फैला रही हैं, जिससे उस पर नियंत्रण पाना अत्यंत चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। सीमित संसाधनों के बावजूद, वन विभाग की टीमें युद्ध स्तर पर राहत और अग्निशमन कार्य में जुटी हैं और आग को फैलने से रोकने के लिए लगातार प्रयास कर रही हैं। भियुधार के जंगलों में लगी आग को बुझाने के लिए जिलाधिकारी गौरव कुमार ने आपदा सचिव को पत्र लिखा है।  पत्र में एयरफोर्स या आपदा प्रबंधन के हेलीकॉप्टर से आग बुझाने की मदद मांगी गई है।  जिलाधिकारी ने अपने पत्र में लिखा है कि प्रभावित क्षेत्र अत्यंत विषम भौगोलिक परिस्थितियों वाला है।  यहां पर अत्यधिक कड़ी चट्टानें और सूखी घास है, इसके साथ ही भारी मात्रा में पाला जमा होने के कारण सतह अत्यधिक विचलन भरी और दुर्गम हो चुकी है। इन कठिन परिस्थितियों और तीव्र ढलान होने के कारण कर्मचारियों का पैदल चलकर घटना स्थल पर पहुंचना मानवीय रूप से संभव नहीं हो पा रहा है। वहां पहुंचने में मानवीय जीवन को जोखिम बना हुआ है। आग पर काबू पाने के लिए 10 और 11 जनवरी को भी प्रयास किया गया लेकिन, काबू नहीं पाया जा सका है। इसके साथ ही जिलाधिकारी ने आपदा प्रबंधन सचिव को अवगत कराया कि इन परिस्थितियों को देखते हुए मानवीय प्रयासों से इस आग को बुझाना असंभव है और कर्मचारियों के जीवन के लिए प्राण घातक भी है। वनाग्नि आपदा की घटना शुष्क मौसम और तेज हवा से अत्यधिक दुर्गम क्षेत्र में फैल सकती है, जिससे अपार संपदा और वन्यजीवों को खतरा पैदा हो सकता है। इसके मद्देनजर वायु सेवा या आपदा प्रबंधन के हेलीकॉप्टर से निगरानी कर आवश्यकता पड़ने पर पानी के छिड़काव की व्यवस्था की जाए।