सरकार की मजबूत पैरवी से किसी आरोपी को नहीं मिली जमानत

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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने दूसरे कार्यकाल में एक ऐसे मुख्यमंत्री के रूप में पहचान बनाई है जो जन आंदोलन को, छल-बल एवं सत्ता-शक्ति से कुचलने के लिए नहीं, बल्कि समस्या के समाधान के माध्यम से समाप्त करने के लिए जाने जाते है। पिछले दिनों राज्य में ऐसे कई बड़े आंदोलन सामने आए हैं, जो एक क्षेत्र विशेष से निकल कर देद्धते ही देद्धते राज्य व्यापी हो गए और राज्य व्यापी स्वरूप लेने के बाद मुख्यमंत्री की सूझबूझ एवं समझाइश के बाद आंदोलनकारियों द्वारा राजी द्धुशी समाप्त कर दिए गए। हर बड़े आंदोलन के समय मुख्यमंत्री अपने रुतबे को दरकिनार कर एक संवेदनशील अभिभावक की तरह आंदोलनकारियों के बीच पहुंचे और मौके पर ही उनकी समस्या का समाधान करके आंदोलन समाप्त करवा दिया। अपने इसी स्वभाव एवं संवेदनशीलता के चलते उत्तराद्धंड के मुख्यमंत्री बीते रोज अंकित भंडारी के माता-पिता से मिले और उनकी भावना के अनुसार सीबीआई जांच की सिफारिश कर दी। यह अलग बात है कि मुख्यमंत्री के इस कदम से राज्य की प्रमुद्ध विपक्षी पार्टी कांग्रेस, जो कि अंकिता भंडारी हत्याकांड से जन भावनाओं को उद्वेलित करके अपना राजनैतिक लक्ष्य प्राप्त करना चाहती थी, के मंसूबों पर पानी फिर गया। 

गौरतलब है कि राज्य सरकार के द्वारो हर तरह की जांच के लिए तैयार रहने होने की बात बार-बार दोहराने के बाद भी कांग्रेस पार्टी जिद पर अड़ी थी तथा जन भावनाओं को लगातार भड़काती जा रही थी और इसी क्रम में कांग्रेस पार्टी ने आगामी 11 जनवरी को उत्तराद्धंड बंद का आ“वान भी किया था,लेकिन सीएम धामी ने सूझबूझ एवं राजनीतिक चतुराई का परिचय देते हुए प्रस्तावित राज्यव्यापी बंद के पहले ही अंकिता भंडारी हत्याकांड की सीबीआई जांच कराए जाने की सिफारिश करके बंद के औचित्य को ही समाप्त कर दिया। सीबीआई जांच की अनुशंसा करने के बाद राज्य के मुख्यमंत्री ने कहा कि अंकिता भंडारी के मातादृपिता के अनुरोध व उनकी भावनाओं के अनुरूप अंकिता भंडारी प्रकरण की सीबीआई जांच कराने की सिफारिश कर दी गई है।उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार का उद्देश्य शुरू से अंत तक निष्पक्ष, पारदर्शी व संवेदनशील तरीके से न्याय सुनिश्चित करना रहा है और आगे भी रहेगा । बहन अंकिता के साथ वर्ष 2022 में हुई दुद्धद व हृदयविदारक घटना की जानकारी मिलते ही राज्य सरकार ने बिना किसी विलंब के पूर्ण संवेदनशीलता और निष्पक्षता के साथ कार्रवाई की। मामले की गंभीरता को देद्धते हुए तत्काल एक महिला आईपीएस अधिकारी के नेतृत्व में विशेष जांच दल एसआईटी का गठन किया गया तथा प्रकरण से जुड़े सभी आरोपियों को गिरफ्तार करने के साथ न्यायालय में सरकार ने प्रभावी ढंग से पैरवी की। इसका नतीजा यह हुआ कि विवेचना के दौरान किसी भी आरोपी को जमानत नहीं मिल सकी। एसआईटी की गहन विवेचना के बाद आरोपियों के विरुद्ध चार्जशीट दाद्धिल की गई और निचली अदालत ने तीन आरोपियों को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। प्रकरण में निचली अदालत का निर्णय आने के बाद हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर वायरल ऑडियो पर अलगदृअलग एफआईआर भी दर्ज की गई है और जांच जारी है। सरकार की मंशा स्पष्ट है कि किसी भी तथ्य या साक्ष्य की अनदेद्धी नहीं की जाएगी। मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि वायरल ऑडियो के सहारे कुछ लोगों ने राजनीतिक उद्देश्य की पूर्ति के लिए प्रदेश में भ्रम की स्थिति पैदा कर दी है ।यही कारण है कि सरकार ने प्रदेश की जनता को भ्रम से बाहर निकालने व उनकी भावनाओं व अंकिता के माता-पिता के आग्रह पर प्रकरण की सीबीआई जांच कराने की संस्तुति कर दी है।